Saturday, 22 July 2017

भगवान शिव को प्रिय है श्रावण मास
श्रावण मास अर्थात सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।मान्यता  है कि इसी मास में जगत जनंनी पार्वती जी ने कठोर व्रत उपवास करके भगवान शिव को प्रसन्न किया और उन्हें पति के रूप में प्राप्त किया. वहीँ एक मान्यता के अनुसार इसी मास में देवी सती ने अपने पिता दक्ष  द्वारा भगवान शिव को यज्ञ में न बुलाये जाने को अपमान मानते हुए यज्ञ वेदी में अपना शरीर त्याग दिया और हर जन्म में शिव को ही अपना पति बनाने का प्रण किया।
शुभ एवं अद्भुत संयोंग
इस वर्ष श्रावण मास का शुभारंभ 10 जुलाई सोमवार से चन्द्रांश  योग में हो रहा है तथा समापन 7 अगस्त को श्रवण नक्षत्र के साथ सोमवार को ही होगा। इस वर्ष श्रवण मास में 5 सोमवारों का संयोग बन रहा है। जिन जातकों की कुंडली में गजकेसरी योग है उनके लिए श्रवण मास में शिव का पूजन विशेष फलदायी होगा। लग्न या चंद्रमा से अगर गुरु केंद्र में हो तथा शुभ ग्रह से दृष्ट हो, अस्त या नीच या शत्रु राशि में  न हो तो गजकेसरी योग बनता है। इस योग वाले जातक जीवन में उच्च पद. धन, संपदा आदि प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यता यह है कि इस मास में प्रातः जल्दी उठकर स्नान के बाद भक्ति भाव और विधि विधान से भगवान शिव का पूजन एवं अभिषेक करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती  हैं तथा उन्हें किसी तरह का कोई भय नहीं रहता। विवाहित महिलाओं को अपने सुहाग की रक्षा के लिए तथा अविवाहित कन्याओं को शीघ्र विवाह तथा गुणवान पति पाने की अभिलाषा के साथ इस मास में व्रत रखना तथा भगवान शिव का अभिषेक करना शुभ फलदायी होता है। विवाह की इच्छा रखने वालों को इस मास के प्रत्येक सोमवार को गाय का कच्चा दूध, बेलपत्र, गंगाजल. शमीपत्र, नारियल पानी, भांग, खोये की मिठाई तथा गुलाबी रंग के गुलाल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिये। संतान के लिए गाय के  दूध व घी एवं गेहूं से, धन प्राप्ति के लिए गाय का दूध, चावल तथा गन्ने के रस से और स्वास्थ्य रक्षा के लिए गाय के दूध व दही से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। शनि की साढ़े साती से  परेशान जातकों  के लिए गाय का दूध , पांच बेलपत्र, भांग, धतूरा,मदार एवं कनेर पुष्प,गंगाजल से अभिषेक करने से लाभ मिलता है।
जन्म राशि के अनुसार अभिषेक
भगवान शिव की कृपा पाने के लिए अपनी जन्म राशि के अनुसार भी भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। जन्म राशि का पता न हो तो अपने बोलते हुए नाम के अनुसार भी अभिषेक किया जा सकता है। मेष और वृश्चिक राशि वालों को पांच बेलपत्र, नारियल पानी,अनार के रस, धतूरा और भांग से, वृष और तुला राशि वालों को आक के पुष्प, शमी पत्र एवं इत्र से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।  मिथुन एवं कन्या राशि वाले जातक  ग्यारह बेलपत्र तथा गंगाजल से अभिषेक कर सकते हैं। कर्क राशि वाले भांग, बेल का रस एवं कदली फल से,सिंह राशि वाले जल, इत्र एवं गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें तो उन्हें लाभ मिलेगा। धनु एवं मीन राशि वालों को सरसों के तेल, कनेरकी पुष्प व दूब घास से और मकर व कुंभ राशि वालों को बेलपत्र, चंदन, और श्री खंड से भगवान् शिव का अभिषेक करना चाहिए। --- प्रमोद  अग्रवाल. ज्योतिषाचार्य , आगरा