Wednesday, 13 November 2013

वैवाहिक जीवन में सुख-शांति लाता है वास्तु अनुरूप बेडरूम

     आवासीय भवन में बेडरूम या शयन कक्ष एक ऐसा महत्वपूर्ण स्थान है जहाँ पति और पत्नी अपना अधिकाँश जीवन साथ-साथ बिताते हैं। लेकिन सब कुछ अच्छा होने के बावजूद बहुत बार यह देखने में आता है  कि उनके बीच बिना किसी उचित कारण के वाद-विवाद तथा मतभेद की स्थिति बनी रहती है जिसकी वजह से उनका पारिवारिक जीवन अशांत और कलहपूर्ण हो जाता है। 
     वैवाहिक जीवन में अगर इस तरह की स्थिति आ रही हो तो वास्तु की दृष्टि से अपने बेडरूम पर एक बार नजर अवश्य डाल लेनी चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि बेडरूम वास्तु दोष से प्रभावित हो। वैवाहिक जीवन को खुशनुमा, सुखी और शांतपूर्ण बनाने के लिए अपने बेडरूम को वास्तु अनुरूप बनाना चाहिए।
+ भवन की दक्षिण-पश्चिम दिशा को बेडरूम के लिए उपयुक्त स्थान माना गया है। लेकिन स्थानाभाव होने पर पश्चिम, उत्तर-पश्चिम अथवा दक्षिण दिशा में भी बेडरूम बनाया जा सकता है। बच्चों के लिए शयन कक्ष पश्चिम दिशा में ही बनाना शुभ रहता है। 
+ बेडरूम की छत का समतल होना आवश्यक है। ढालू छत वास्तु के अनुसार  दोषपूर्ण है। यदि बेडरूम की छत ढालू है तो बेड छत की उस दिशा की ओर रखना चाहिए जहां छत  की ऊंचाई कम हो। 
+ पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम सम्बन्धों की मजबूती के लिएबेडरूम में दीवारों का रंग गुलाबी अथवा हल्का पीला रखा जाए तो अच्छा रहता है। नीला, लाल, काला या बेंगनी रंग अनावश्यक टकराव और मानसिक तनाव देता है। इसलिए बेडरूम में इन रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। 
 + बेडरूम में लेंटर की बीम या लोहे की गाटर हो तो बेड को भूलकर भी इनके नीचे नहीं लगाना चाहिए बल्कि अलग हटकर ही सोने का स्थान बनाना चाहिए। 
+ बेडरूम में शयन करते समय किसी भी परिस्थिति में दक्षिण दिशा में पैर नहीं होने चाहिए। इसी प्रकार बेडरूम के मुख्य प्रवेश द्वार की और सिर या पैर करके शयन करना भी दोषपूर्ण माना गया है। पूर्व दिशा में पैर करके शयन करने से सुख समृद्धि तथा पश्चिम दिशा में पैर करके शयन करने से धार्मिक व आध्यात्मिक भावनाओं में वृद्धि होती है। 
+ बेडरूम में दर्पण लगी ड्रेसिंग टेबल सिर के सामने नहीं होनी चाहिए। अगर जगह की कमी हो तो शयन करने से पूर्व दर्पण को किसी वस्त्र या चादर से ढक देना चाहिए। 
+  बेडरूम में कभी भी झाडू, अँगीठी, तेल का भरा हुआ टिन, कढाही,चिमटा, जल से भरा बड़ा बर्तन, मछली घर, सामान रखने का टोकरा, नशीले पदार्थ, सफ़ेद या पीले रंग के संगमरमर से बनी कोई मूर्ति या वस्तु, पीपल, नीम या गूलर, गूलर के पत्ते या टहनी आदि अन्य अनुपयोगी सामान नहीं रखना चाहिए। 
+ बेडरूम में दीवार पर स्वस्थ, सुन्दर और हँसते हुए बच्चे का चित्र, राधा-कृष्ण का सयुंक्त चित्र, खिले हुए गुलाब के जोड़े का चित्र लगाया जाना शुभ होता है।  परन्तु सर्प, गिद्ध, उल्लू, बाज, कबूतर, कौआ, बगुला, चीता और युद्ध व राक्षसों के चित्र अथवा मूर्ति नहीं लगानी चाहिए। 
+ बेडरूम में रात्रि के समय जलाने के लिए लगाया जाने वाला बल्व सदैव उत्तर-पूर्व दिशा यानि ईशान कोण में ही लगाना चाहिए। शयन करते समय बेडरूम में पूर्ण अन्धकार रखना दोषपूर्ण होता है। प्रमोद कुमार अग्रवाल



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