Monday, 21 October 2013

सौभाग्य और संतान देने वाला है करवा चौथ का व्रत

  पति के स्वास्थ्य, लम्बी आयु, और सौभाग्य के साथ-साथ संतान सुख प्राप्त करने के लिये विवाहित महिलाओं द्वारा करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को होता है। इस दिन महिलायें निर्जला व्रत रखते हुये शाम को व्रत के महात्म की कथा सुनती हैं और रात में चंद्रमा निकलने पर उसे अर्घ्य देकर भोजन करके व्रत का परायण करती हैं।
     करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं द्वारा मिलकर व्रत की कथा सुनते समय चीनी अथवा मिट्टी के करवे का आदान-प्रदान किया जाता है तथा घर की बुजुर्ग महिला जैसे ददिया सास, सास, ननद या अन्य सदस्य को बायना, सुहाग सामग्री, फल, मिठाई, मेवा, अन्न, दाल आदि एवं धनराशि देकर और उनके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लिया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव शंकर, माता पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और चंद्र देवता की पूजा अर्चना करने का विधान है।
     करवा चौथ के संबंध में एक कथा का उल्लेख मिलता है। प्राचीनकाल में एक धर्मपरायण साहूकार के सात बेटे तथा एक बेटी थी। बडी होने पर बेटी का विवाह हो गया। विवाह के बाद जब वह अपने मायके आई तो करवा चौथ का दिन भी पडा। उसने उस दिन निर्जला व्रत रखा। चंद्रमा निकलने से पहले ही उसे भूख सताने लगी। भूख के कारण उसका कोमल चेहरा मुरझाने लगा। बहन की यह दशा देखकर उसके भाईयो ने एक दीपक जलाकर छलनी से ढकते हुये नकली चंद्रमा बनाया और बहन ने बोले कि चांद निकल आया है, अर्घ्य देकर व्रत खोल लो। अपने भाईयो की बात पर विश्वास करके बहन ने चंद्रमा को अर्घ्य दे  दिया और भोजन कर लिया । भोजन के  समय उसके ग्रास में बाल और कंकड निकले। उसकी ससुराल से पति के गंभीर बीमार होने का समाचार भी आ गया। वह तत्काल मायके से विलाप करती हुई अपनी ससुराल के लिये चल पडी।
     दैवयोग ऐसा रहा कि उसी समय इन्द्राणी देवदासियो के साथ आकाश मार्ग से निकाल रही थी। उसने विलाप करती बहन को देखा तो वह उसके पास आ गई  और विलाप करने का कारण पूछा। कारण जानने के बाद इन्द्राणी ने कहा कि तुमने करवा चौथ के व्रत में चन्द्रमा निकलने से पहले ही अन्न-जल ग्रहण कर लिया था, इस कारण ही तुम्हारे पति की यह दशा हो गई है। अपने पति के प्राणो की रक्षा के लिए तुम्हें एक वर्ष तक हर माह चतुर्थी तिथि को व्रत रखते हुए पति की सेवा करनी होगी। करवा चौथ वाले दिन निर्जल व्रत रखकर विधि-विधान से गौरा पार्वती, भगवान शिव, कार्तिकेय और गणेश की पूजा करके और रात्रि में चन्द्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर ही अन्न-जल ग्रहण करने से तुम्हें तुम्हारा सुहाग वापस मिल जाएगा।
     इन्द्राणी के कहे अनुसार उस कन्या ने एक वर्ष तक पूरे मनोयोग से अपने पति की सेवा की, हर माह की चतुर्थी तिथि को नियम धर्म से व्रत रखते  हुए करवा चौथ के दिन निर्जला व्रत रखा और रात्रि में चन्द्रमा निकलने पर उसे अर्घ्य देकर व्रत का परायण किया। उसके द्वारा चौथ माता से अपनी भूल के लिए क्षमा याचना करते हुए पति के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना भी की गई. इससे चौथ माता ने प्रसन्न होकर उसके पति को स्वस्थ कर दिया।
     करवा चौथ की यह कथा सुनने से विवाहित महिलाओं का सुहाग बना रहता है, उनके घर में सुख, शान्ति,समृद्धि और सन्तान सुख मिलता है। महाभारत में भी करवा चौथ के महात्म पर एक कथा का उल्लेख मिलता है, जिसके अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने द्रोपदी को करवा चौथ की यह कथा सुनाते हुये कहा था कि पूर्ण श्रद्धा और विधि पूर्वक इस व्रत को करने से समस्त दुख दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-सौभाग्य तथा धन-धान्य की प्राप्ति होने लगती है। श्री कृष्ण भगवान की आज्ञा मानकर द्रोपदी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा था। इस व्रत के प्रभाव से ही अर्जुन सहित पांचो पाण्डवो ने महाभारत के युद्ध में कौरवो की सेना को पराजित कर विजय हासिल की।
     करवा चौथ के व्रत में चन्द्रमा निकलने तक कुछ भी अन्न-जल ग्रहण नहीं किया जाता है, इसलिये व्रत रखने से पूर्व महिलाओं को एक दिन पहले रात्रि में अपनी रुचि के अनुसार भोजन, मिष्ठान, फल आदि का सेवन अवश्य कर लेना चाहिये। जिन महिलाओं को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, खून की कमी आदि बीमारी हो अथवा वे गर्भवती हो तो उन्हे अपने डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही व्रत रखना चाहिये। व्रत खोलते समय खाली पेट सिर्फ पानी नहीं पीना चाहिये बल्कि पहले कुछ मीठा या फल खाने के बाद ही पानी लेना चाहिये। ताजा फलो का रस भी लिया जा सकता है। खाली पेट पानी पीने से ऐसीडिटी अथवा पेट दर्द की समस्या हो सकती है। व्रत के बाद भोजन एक साथ न करके थोडे-थोडे अंतराल पर ही करना चाहिये। भोजन में अधिक तले-भुने और गरिष्ट खाद्य पदार्थो के सेवन से बचना चाहिये। व्रत शरीर और मन की शुद्धता के लिये किये जाते हैं,  इसलिये यह आवश्यक है कि महिलाये समझदारी से व्रत रखे और अपने संपूर्ण परिवार की खुशहाली का माध्यम बने। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल,फलित ज्योतिष और वास्तु सलाहकार

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