Friday, 4 October 2013

शारदीय नवरात्र में श्री राम और हनुमान उपासना से होता है कल्याण

     आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथिसे शारदीय नवरात्र का शुभारम्भ  है. इस तिथि से नौ दिनों तक दुर्गाजी की पूजा-अर्चना होती है और दशमी तिथि को विजय पर्व दशहरा का त्यौहार मनाया जाता है. नवरात्र और दशहरा एक-दूसरे के पर्याय हैं क्योकि जहाँ एक ओर इन दिनों जगत जननी माँ दुर्गा की आराधना होती है, वहीँ दूसरी ओर भगवान् विष्णु के अवतार भगवान् श्री राम के जन्म से लेकर कौशल राज्य के राजा के रूप में राजगद्दी सम्हालने और आगे तक की लीलाओं का मंचन किया जाता है.
  नवरात्र में माँ दुर्गा और प्रभु श्री राम की उपासना किये जाने के सम्बन्ध में यह  माना जाता है कि रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए श्री राम ने आश्विन मास में माँ शक्ति की आराध्य दुर्गाजी के काली स्वरुप की श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था. 
  मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम ने दुर्गाजी की कृपा से अपने सहयोगियों सुग्रीव, विभीषण, जामवंत, हनुमान, अंगद आदि के नेतृत्व में लंकापति रावन के साथ युद्ध किया और उस पर विजय प्राप्त करके अन्याय और अत्याचार के युग का अंत किया। उसी समय से नवरात्र पूजन का चलन हुआ माना जाता है. नवरात्र पूजन के दौरान दुर्गाजी की भक्ति के साथ-साथ श्री  रामजी  की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए रामायण का अखंड पाठ और श्री राम के अनन्य भक्त मारुती नन्दन अंजनी पुत्र पवनसुत हनुमान जी की भी आराधना की जाती है. हनुमान जी के दिव्य एवं संकटमोचक चरित्र को जानने के लिए श्रीरामचरित मानस का सुन्दरकाण्ड और हनुमान चालीसा अद्भुत ग्रन्थ हैं. रुद्रावतार श्री हनुमान की श्री राम के प्रति अनन्य भक्ति, समर्पण भाव, निःस्वार्थ  प्रेम, मित्रता, वफादारी, परोपकार की भावना अपने आप में एक  मिसाल है. सदैव अमरता का वरदान प्राप्त हनुमान जी की उपासना और श्रद्धा भाव से उनके नाम का स्मरण मंगलकारी, विघ्ननाशक तथा संकटमोचक है.
   कहते हैं कि प्रभु श्री राम की कृपा से हनुमान जी को सदैव अमरता का वरदान मिला हुआ है. जहाँ कहीं भी रामायण का पाठ होता है, श्री राम जी की महिमा का बखान होता है अथवा दुर्गाजी की आराधना होती है, वहां हनुमान जी अवश्य ही उपस्थित रहते हैं. हनुमानजी के ह्रदय में दुर्गा जी के प्रति इतना अधिक प्रेम और श्रद्धा है कि वे स्वयं उनके आगे-आगे विजय पताका यानि ध्वज लेकर चलते हैं. जिस प्रकार दुर्गाजी लाल वस्त्र एवं चुनरी धारण करतीहैं, उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने शरीर पर लाल सिन्दूर और लाल वस्त्र धारण करना पसंद करते हैं. दुर्गाजी के समान ही हनुमानजी पर लाल रंग के पुष्प जैसे लाल  कनेर,कुमुद, केतकी, मालती, मल्लिका, नागकेसर, कमल आदि अर्पित किये जाते हैं. 
    नवरात्र में दुर्गाजी और श्री रामजी की अद्भुत कृपा पाने के लिए तुलसी दास द्वारा रचित श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है. वहीँ सुन्दरकाण्ड का पाठ करके हनुमान जी को प्रसन्न किया जा सकता है. वैसे तो सम्पूर्ण हनुमान चालीसा की प्रत्येक चौपाई तथा दोहे चमत्कारी  प्रभाव रखते हैं, फिर भी इसकी कुछ चौपाइयाँ ऐसी हैं जिनके पढ़ने और स्मरण करते रहने से बहुत से कष्ट, रोग एवं समस्याओं का त्वरित समाधान हो जाता है. 
     मन की शुद्धता और बुरे विचारों को दूर करने के लिए "महावीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।"का पाठ करना चाहिए। भूत-प्रेत जैसी बाधा से मुक्ति पाने के लिए "भूत पिसाच निकट नहीं आवैं। महाबीर जब नाम सुनावै।।" का जप करना चाहिए। शारीरिक एवं मानसिक बीमारियों में लाभ प्राप्त करने के लिए "नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। का पाठ बार-बार करना चाहिए।
     जीवन में आने वाले तरह-तरह के संकटों से बचने के लिए हनुमान चालीसा की ये दो चौपाई सहायता करती हैं:-"संकट ते हनुमान छुडावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।"तथा  "संकट कटे मिटे सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।" मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए "और मनोरथ  जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।" का जप करना लाभकारी होता है.
    जीवन की विभिन्न समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए सुन्दरकाण्ड का पाठ भी श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है. वैसे तो सुन्दरकाण्ड के नियमित पाठ से शीघ्र लाभ मिलता है, लेकिन अगर समय का अभाव हो तो सप्ताह में दो बार अर्थात मंगलवार और शनिवार को यह पाठ अवश्य करना चाहिए। कहते हैं कि हनुमान उपासना एवं सुन्दरकाण्ड का पाठ करने से दोषपूर्ण मंगल और शनि ग्रह के दुष्प्रभाव भी दूर होने लगते हैं.                 सुन्दरकाण्ड का पाठ करने से संतान बाधा, व्यापार बाधा, असाध्य रोग, शत्रु पीड़ा, परिश्रम के बावजूद असफलता, वास्तु दोष आदि दूर होने लगते हैं और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मकता एवं शुभता आने लगती है.
सुन्दरकाण्ड में दी गयी चौपाई "प्रबिसि नगर कीजे सब काजा, ह्रदय राखि कौसलपुर राजा।" ; " गरल सुधा रिपु करहिं मिताई, गोपद सिंधु अनल सितलाई।" ; "दीन दयाल बिरदु संभारी, हरहूँ नाथ मम संकट भारी।" ;  "अब मोहि भा भरोस हनुमंता। बिनु हरिकृपा मिलहिं नहिं संता।।" ; "आसिष दीन्हि रामप्रिय जाना। होहु तात बल सील निधाना।।" ; " तुम्ह कृपाल  अनुकूला। ताहि  न ब्याप त्रिबिध भव सूला" ; "करहुं कृपा प्रभु अस  । निर्भर प्रेम मगन हनुमाना।।" ; "कर जोरें सुर दिसिप बिनीता। भृकुटी बिलोकत सकल सभीता।।" ; "देखि प्रताप न कपि मन संका। जिमि अहिगन महूँ गरुड़ असंका।।" ; "सकल चरित कहि प्रभुहि सुनावा। चरन बंदि पाथोधि सिधावा।।" का पाठ करने से आशातीत लाभ होते हैं.  
     जीवन में रोग, कष्ट और समस्याओं निजात पाने के लिए हनुमान जी की उपासना और उपरोक्त पाठ करना विशेष फलदायी होता है तथा भक्तों पर हनुमान जी एवं प्रभु श्री राम तथा जानकी जी की कृपा  बनी रहती है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल,फलित ज्योतिष और वास्तु सलाहकार

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