Friday, 14 June 2013

दुर्लभ और पुण्य दाई है गंगा स्नान

"सर्वत्र सुलभा गंगा त्रिशुस्थानेशु दुर्लभा।
गंगा द्वारे प्रयागे च गंगा सागर संगमे।।"
यद्यपि गंगा सर्वत्र सुलभ है परन्तु हरिद्वार, प्रयाग और गंगा सागर के संगम में गंगा दुर्लभ है। भारतीय धर्म एवं संस्कृति में गंगा को पवित्र माना गया है। गंगा स्नान से मनुष्य के समस्त पापों का अंत हो जाता है। अभीष्ठ की सिद्धी प्राप्त करने के लिए  गंगा स्नान के बाद श्रद्धा भाव से दान अवश्य करना चाहिए। अपने पूर्वजों एवं मृतात्माओं की शांति के लिए गंगा जी में स्नान, दान, जप, तप, पूजा, श्राद्ध और तर्पण करना विशेष फलदायी माना गया है।
पुराणों के अनुसार ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, हस्त नक्षत्र, बुधवार, दशमी तिथि, गर करण, आनंद योग, व्यतिपात, कन्या राशि और वृष राशि के सूर्य में यदि गंगा स्नान किया जाये तो मनुष्य को महान पुण्य़  मिलता है। इन दिनों अगर दशमी तिथि भी हो तो गंगा स्नान सभी पापों का नाश करके मोक्षदायी हो जाता है।
श्री गंगा  दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल की दशमी तिथि को होता है। इस वर्ष इस दिन व्यतिपात भी होने से गंगा  में स्नान करना पुण्य़ फल प्रदान करने वाला है।
जो मनुष्य इस पवित्र दिन गंगा में प्रसन्न भाव से विधि पूर्वक स्नान करके दान आदि करता है वह इस जन्म में सुख भोग करके मृत्यु के उपरान्त भगवान् विष्णु के धाम को प्राप्त करता है। ऐसा नारद पुराण में वर्णित है।
"गंगा  पश्यति यः स्तौति स्नाती भक्त्या पिबेज्जलम।
स स्वर्ग ज्ञान माम्लम योगम मोक्षं च विन्दन्ति।।" 
गंगा  जी के दर्शन मात्र से मनुष्य की समस्त इन्द्रियों के दुर्व्यव्सन, निर्दयता और पाप पूर्ण आचरण दूर हो जाते हैं। गंगा  जी में स्नान करने से मन निर्मल हो जाता है तथा मोक्ष मिलता है। अविनाशी सनातन पद प्राप्त करने के लिए श्री गंगा  जी के जल को बार-बार स्पर्श करना कहा गया है। 
भगवान् विष्णु के चरण कमलों से प्रकट हुई गंगा जी भगवान् शिव के मस्तक से होकर मंद-मंद वेग से इस सम्पूर्ण धरती के प्राणियों और पादपों का पोषण  करती है। पवित्र गंगा  के तट पर भक्ति भाव से गंगा -गंगा  का उच्चारण करना भी पापों को नष्ट कर देने वाला माना गया है। गंगा  में स्नान करने वाला मनुष्य अपने माता-पिता  के कुल की कई पीढ़ियों का उद्धार करके उन्हें भगवान् विष्णु के धाम पहुंचा देता है। गंगा स्नान के साथ गंगा जल का पान करने से मनुष्य की सातों पीढियां पवित्र और पाप मुक्त हो जाती हैं। श्री गंगा  दशहरा के पावन पर्व की सार्थकता के लिए पवित्र गंगा  को प्रदूषण  मुक्त रखना परम आवश्यक है और हम सभी धर्म प्रेमियों का पावन दायित्व भी है। --- प्रमोद कुमार अग्रवाल, फलित ज्योतिष और वास्तु सलाहकार 

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