Thursday, 23 May 2013

23 मई, 2013 : नृसिंह चतुर्थी पर विशेष:


23 मई, 2013 : नृसिंह चतुर्थी पर विशेष: 
समस्त कामनाओं को पूर्ण करते हैं श्री नृसिंह भगवान
भू-लोक पर जब-जब अत्याचार और अनाचार में वृद्धि होती है , सर्व देवमय भगवान अवतरित होकर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और पापियों का संहार करते हैं। भगवान की यह लीला अपरम्पार है। सतयुग में अपने प्रिय बाल भक्त प्रहलाद की भक्ति और शरणागति की श्रेष्ठता को सिद्ध करने के लिए श्री  नृसिंह भगवान का प्रादुर्भाव हुआ। आधा शरीर मनुष्य का तथा आधा शरीर सिंह का धारण करके श्री नृसिंह भगवान ने भक्त प्रहलाद के पिता हिरण्यकशिपु का उद्धार किया, जबकि उसे मृत्यु न होने का वरदान प्राप्त था। 
पुरुषोत्तम तीर्थ में नित्य निवास करने वाले श्री नृसिंह भगवान का भक्तिपूर्वक दर्शन एवं आराधना समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली और समस्त पापों से मुक्ति दिलाने वाली है। पुराणों के अनुसार जो मनुष्य श्री  नृसिंह भगवान की भक्ति करते हैं , वे सदैव पाप मुक्त बने रहते हैं और धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष के फल को प्राप्त करते हैं। श्री नृसिंह भगवान की पूजा-अर्चना जाति बंधनों से परे है। कोई भी ब्राह्मण, वैश्य, स्त्री, शूद्र आदि मनुष्य अगर भक्ति भाव से श्री नृसिंह भगवान की आराधना करें तो वे करोड़ो जन्मों के अशुभ प्रभाव और दुःख से मुक्त हो जाते हैं। भक्तों पर श्री  नृसिंह भगवान की कृपा हो जाए तो स्वर्ग, मर्त्य लोक, पाताल, अन्तरिक्ष, जल, असुर लोक आदि स्थानों में अबाध गति को प्राप्त होते हैं। 
नारद पुराण में कहा गया है कि किसी भी स्थान जैसे वन, एकांत स्थल, नदी तट, पर्वत, ऊसर भूमि, सिद्ध क्षेत्र, घर, मंदिर आदि में श्री नृसिंह भगवान की मूर्ति बनाकर पूजा करना शुभ फलदायी होता है। श्री नृसिंह भगवान कवच का एक बार जप करने से समस्त उपद्रव शांत होते हैं। इस कवच का तीन बार जप करने से भूत, पिशाच, राक्षस, अन्यायी और अत्याचारियों का भय नहीं रहता है। कपूर एवं चन्दन युक्त चमेली के पुष्प श्री नृसिंह भगवान पर अर्पित करने से कार्यों में सफलता मिलने लगती है। 
श्री नृसिंह भगवान के बीज मन्त्रों का जप भी विशेष फल प्रदान करने वाला माना गया है। रोगों से मुक्ति पाने के लिए "ॐ श्री  नृ नरसिंहाय नमः " का जप करना चाहिए। संतान प्राप्ति के लिए "ॐ श्री  नृ नृ नरसिंहाय नमः"का और धन लाभ एवं कष्टों से मुक्ति पाने के लिए " ॐ श्री  नृ नृ नृ नृ नरसिंहाय नमः" का जप करना चाहिए। ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचने के लिए श्री नृसिंह भगवान पर लोहे की कील अर्पित की जाती हैं। रुके हुए धन को प्राप्त करने के लिए श्री नृसिंह भगवान पर मोती एवं चांदी अर्पित करना शुभ माना गया है। मन, वाणी और शरीर से होने वाले समस्त पापों से मुक्ति हेतु श्री  नृसिंह भगवान की पूर्ण श्रद्धा भाव तथा विधि-विधान से आराधना करना श्रेष्ठ उपाय है। --- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद 

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