Tuesday, 12 February 2013

देवी सरस्वती की उपासना से मिलता है

ज्ञानसमस्त ऋतुओं में वसंत को ऋतुओं का राजा माना गया है क्योंकि इस अवसर पर प्रकृति का अनुपम सौंदर्य समस्त प्राणियों के मन को मोह लेने वाला हो जाता है। खेतों में सरसों की स्वर्णिम रंगत, वृक्षों पर नई  कोपलों का आगमन और मौसम में हल्की सर्दी एवं गर्मी का मिला-जुला अहसास, आम्र मंजरी की अद्भुत सुगंध, बाग़-बगीचों में रंग-बिरंगे पुष्पों का अनुपम सौंदर्य तथा पक्षिओं का सुमधुर कलरव वसंत के माध्यम से शरीर में अजीब सी मादकता का अहसास कराता है।

वसंत पंचमी वाणी और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती तथा भगवान् विष्णु की आराधना का विशेष दिवस है। इस दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल का उबटन लगाने के बाद स्नान किया जाना शुभ माना जाता है। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान् विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। वसंत पंचमी के दिन ब्राह्मण को भोजन कराने और पितृ तर्पण करने का भी विधान है। वसंत पंचमी के दिन विशेष रूप से माँ सरस्वती जी के पूजन को महत्त्व दिया गया है। छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान करने की शुरुआत भी इसी दिन से की जाती है। वाणी, ज्ञान एवं विद्या प्राप्त करने के लिए पीत रंग के वस्त्र पहन कर देवी सरस्वती जी की प्रतिमा अथवा चित्र पर पीले रंग के पुष्प, पीले रंग का चन्दन, धूप, दीप आदि के साथ अर्पण कर के शुद्ध चित्त भाव से '' ॐ एं सी क्लीं सरस्वत्यै  नमः '' मन्त्र का 108 बार जप करना चाहिए। इसके अलावा इस अवसर पर सरस्वती पूजन के साथ-साथ श्री गणेश, सूर्य देव, भगवान् शिव और विष्णु जी की भी आराधना करने से इन सभी की विशेष कृपा प्राप्तहोती है।
 वसंत पंचमी के  अवसर पर किसान खेतों से नया अनाज लाकर उसमें शुद्ध घी एवं मीठा मिला कर अग्नि देव को अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि  इससे समस्त देव और पितृ गण तृप्त होकर अपना शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हैं। देश के अनेक भागों में  वसंत पंचमी के दिन काम देव और रति की पूजा करके उन्हें प्रसन्न किया जाता है। ब्रज क्षेत्र में इस दिन से होली पर्व का शुभारम्भ हो जाता है जो फाल्गुन मॉस की पूर्णिमा तक सभी को स्नेह, प्रेम एवं सौहार्द  के रंगों में सराबोर कर देता है।
विचारों की पवित्रता, ज्ञान, विद्या और वाणी की शुद्धता के लिए माँ सरस्वती के प्रमुख श्लोक '' सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने। विद्या रूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते। या देवी सर्वभूतेषु  विद्या रूपेण  संस्थिता। नमस्तस्यै  नमस्तस्यै  नमस्तस्यै  नमो नमः।'' का जप वसंत पंचमी के दिन 108 बार करना विशेष शुभ फलदायी होता है।--- प्रमोद कुमार अग्रवाल, फलित ज्योतिष और वास्तु सलाहकार 

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