Thursday, 27 December 2012

कुंडली से जानिये रोगों के बारे में

ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली के द्वारा जातक को होने वाले रोगों का भी पता लगाया जा सकता है। कुंडली के षष्टम भाव में स्थित राशि, भाव के स्वामी तथा इस भाव पर पड़ने वाले विभिन्न ग्रहों के प्रभाव के अध्ययन से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिल सकती है। फलित ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रह के कुपित होने से जातक को सिर व मष्तिष्क,ह्रदय,नेत्र एवं कर्ण रोग,अस्थि भंग,शारीरिक कमजोरी, शरीर में जलन जैसी समस्याएं होने का अंदेशा रहता है। चन्द्र ग्रह के प्रभाव से मानसिक रोग, नींद न आना, रक्त विकार, ब्लड प्रेशर, रक्त की कमी, जल से भय तथा उन्माद होने का अंदेशा रहता है।
मंगल ग्रह  के कुपित होने से पित्त विकार, त्वचा रोग, टाय़फाइड और अपेंडिक्स हो सकते हैं। वहीं बुध ग्रह  के कारण वात, पित्त और कफ से सम्बंधित रोग, नाक एवं गले के रोग तथा बुद्धि की कमी की संभावनाएं रहती हैं। गुरु ग्रह के कुपित होने से गठिया, कमर व जोड़ों में दर्द, शरीर में सूजन, कब्ज़ आदि समस्याएं होने लगती हैं। यदि शुक्र ग्रह कुपित हो तो जातक को वात एवं कफ रोग होने के साथ-साथ शरीर के अंदरूनी हिस्सों में रोग होने की संभावनाएं रहती हैं।
शनि ग्रह के कुपित होने से वात एवं कफ रोग, कैंसर, श्वसन रोग, रक्त की कमी जैसे रोग होने लगते हैं। यदि जातक राहु ग्रह से प्रकोपित हो तो उसे संक्रामक रोग, रक्त की कमी, ह्रदय रोग, विष जनित रोग तथा हाथ और पेरों में दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यदि केतु ग्रह कुपित हो तो जातक त्वचा रोग, पित्त विकार, पाचन संबंधी रोग और हैजा का शिकार हो सकता है। ----प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद 

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