Saturday, 15 December 2012

वेदों का नेत्र है ज्योतिष शास्त्र

ज्योतिष शास्त्र को वेदों का नेत्र माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के आधार पर जन्म कुंडली के विभिन्न भावों में बैठे ग्रहों के अनुसार जातक के जीवन के सम्बन्ध में जानकारी की जा सकती है।
ज्योतिष शास्त्र भविष्य का निर्धारण नहीं करता बल्कि जन्म कुंडली में जो रहस्य छिपे हैं सिर्फ उन्हें स्पष्ट करता है। यदि जातक की कुंडली में ग्रहों की स्थिति  दोषपूर्ण है तो ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार उन दोषों के निवारण के लिए कुछ उपाय करके जीवन को सुखी, संपन्न और कष्ट रहित बनाया जा सकता है। लेकिन इतना अवश्य याद रखना चाहिए कि  जीवन में जो भी कुछ घटता है अथवा घटित होने वाला है वह तो होगा ही क्योकि ईश्वर ने जो भी मनुष्य के भाग्य में लिखा है उसे न तो जाना ही जा सकता है और न ही उस पर अंकुश लगाया जा सकता है, हाँ इतना अवश्य है कि  ज्योतिष ज्ञान के माध्यम से मनुष्य के जीवन की व्यक्तिगत, पारिवारिक, व्यावसायिक, शेक्षिक आदि क्षेत्र की समस्याओं की पूर्व जानकारी हो जाने  से वे  अपने को उस समस्या या कष्ट का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार कर सकते हैं और बताये गए उपायों के द्वारा उनके प्रभाव को कम कर सकते हैं।
-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद  

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