Friday, 14 December 2012

शनि को प्रसन्न करने के उपाय


सौर मंडल में भ्रमण करने वाले नौ ग्रहों में शनि एक ऐसा ग्रह  है  जिसे  दुःख देने वाला माना जाता है। शनि ग्रह  के मारकेश या अष्टमेश में होने, शनि की साढ़े साती अथवा शनि की ढईया होने पर जातक के जीवन में अशुभ प्रभाव देखने को मिलते हैं। शनि ग्रह  मकर और कुम्भ राशियों के स्वामी हैं। तुला राशि में शनि उच्च के तथा मेष राशि में शनि नीच के होते हैं। सूर्य, चन्द्र और मंगल शनि के शत्रु हैं।
शनि के कुपित होने से जीवन में धन की कमी, कष्ट, शारीरिक बीमारियाँ, कैंसर, दांत व दाढ़  में दर्द, लकवा, कलह, अकारण विवाद, पदावनति, दुर्बलता, चिंता जैसी समस्याओं का सामना करना पड  सकता है। शनि के प्रसन्न होने पर जातक न्याय-प्रिय, सुखी, संपन्न और अतुलनीय धन-सम्पदा  का स्वामी हो जाता है।
शनि के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए पक्षिओं को दाना चुगाना, अपनी परछाई देख कर शनिवार के दिन सरसों के तेल का दान करना, अमोघ शिव कवच और महा मृत्युंजय मन्त्र का जाप करना, शनि स्त्रोत का पाठ करना, प्रत्येक शनिवार को उपवास करके श्री हनुमानजी की भक्ति भाव से आराधना करना उपयुक्त माना गया है। इसके अलावा लाल चन्दन की अभिमंत्रित माला अथवा श्रवण नक्षत्र में शनिवार के दिन काले रंग के धागे में शमी की अभिमंत्रित जड़ या बिच्छू घास की जड़ धारण करने, शनि से सम्बंधित वस्तुएं जैसे तेल, लोहा, काले तिल, कुल्थी या काली मसूर की दाल, काले जूते, कस्तूरी, नीलम रत्न आदि का दान करने से भी शनि के अशुभ प्रभाव से बचा जा सकता है।
शनि से सम्बंधित लघु मन्त्र 'ॐ प्रां प्रीम प्रों सः शनये नमः'  का निरंतर जाप करते रहने से भी शनि प्रसन्न होते हैं और जातक के दुःख एवं कष्टों का निवारण होने लगता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद 

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