Thursday, 27 December 2012

देवी लक्ष्मीजी का प्रतीक है झाड़ू

दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं में झाडू अर्थात बुहारी का अपना विशेष महत्त्व है। झाडू का उपयोग घर, दुकान, व्यापारिक प्रतिष्ठान आदि की साफ़-सफाई में होता है। शास्त्रों के अनुसार झाडू को धन की देवी महा लक्ष्मीजी का प्रतीक मानते हुए झाडू को उचित और साफ़ सुथरी जगह पर रखा जाता है। कहते हैं कि नियमित रूप से प्रातः एवं सायं काल में घर और कार्यस्थल की झाडू से सफाई करने से स्वच्छता के साथ-साथ धन की प्राप्ति  भी होती है। जिन घरों में नियमित रूप से झाडू नहीं लगाई  जाती वहां दरिद्रता का वास रहता है। 
झाडू को महालक्ष्मीजी  का प्रतीक मानने वालों के अनुसार झाडू को कभी भी पैर नहीं लगाने चाहिए। झाडू का उपयोग पूरा होने के बाद उसे किसी भी ऐसे सुरक्षित स्थान पर रख देना चाहिए जहाँ इस पर किसी की नजर न पड़े। अपवित्र, गंदे और पानी वाले स्थान पर कभी भी झाडू को नहीं रखना चाहिए। दीवार के सहारे भी झाडू को खडी अवस्था में नहीं रखा जाता है। घर, दुकान अथवा कार्यस्थल आदि की सफाई में काम आने वाली झाडू से भूल कर भी सड़क, नाली या मल -मूत्र की सफाई नहीं करनी चाहिए। घर के किसी सदस्य या मेहमान के जाने के तुरंत बाद भी झाडू लगाना अशुभ माना जाता है। 
घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से दरिद्रता रूपी गंदगी को सदैव दूर रखने के लिए यह बहुत आवश्यक है कि प्रतिदिन वहां की झाडू की मदद से सफाई की जाये। यहाँ इस बात का भी  अवश्य ध्यान रखा जाना चाहिए कि  झाडू को काम में लेने के बाद उसे साफ़ और सुरक्षित स्थान पर रखें। यदि भूल से भी झाडू से पैर लग जाए तो महालक्ष्मीजी से क्षमा याचना करते हुए झाडू को हाथ लगा कर अपने माथे से लगा लें। झाडू का सम्मान करने से निश्चय ही महा लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है और घर एवं व्यापारिक प्रतिष्ठान में सुख शांति तथा धन संपत्ति का आगमन होता है।--- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद  

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