Friday, 14 December 2012

बजरंग बाण के पाठ से होता है कष्टों का निवारण

 मनुष्य के जीवन में सुख और दुःख साथ-साथ चलते हैं। दुःख के समय में मनुष्य सर्व शक्तिमान ईश्वर से प्रार्थना करते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना करता है। जीवन में दुर्भाग्य, भूत-प्रेत की बाधा, असाध्य रोग, शारीरिक और मानसिक कष्ट, कारोबार में रूकावट जैसी समस्याएँ आने पर प्रभु श्री राम के परम भक्त मंगल मूर्ति मारुति नंदन श्री हनुमान जी का  पूर्ण श्रद्धा भाव से पूजन तथा बजरंग बाण का पाठ करना शुभ फलदायी माना गया है। इसके लिए अपनी सुविधानुसार मंगलवार अथवा शनिवार के दिन स्नान आदि से निवृत्त होने के उपरान्त पूजन स्थल पर हनुमान जी का चित्र या मूर्ति  की स्थापना करके वहां लाल रंग का आसन लगायें। अगर घर में स्थान की कमी हो अथवा घर का वातावरण अशांत हो तो किसी भी एकांत स्थल या हनुमान जी के मंदिर में यह अनुष्ठान किया जा सकता है।
 हनुमान जी की उपासना एवं पाठ  से पूर्व गेंहू, चावल, मूंग, उड़द और काले तिल  के मिश्रित आटे  का दीपक बनाकर शुद्ध तिली के तेल तथा लाल रंग में रंगे सूत की पंचमुखी बत्ती से दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। शुद्ध गूगल, धूप, लाल रंग के पुष्प, लाल चन्दन या लाल रोली आदि से हनुमान जी की ध्यान मग्न होकर उपासना करते हुए बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। यहाँ यह ध्यान देना आवश्यक है कि  एक ही बैठक में बजरंग बाण के एक सौ आठ पाठ पूरे किये जाएँ और इस दौरान दीपक लगातार प्रज्वलित होता रहे। पाठ पूर्ण होने पर हनुमान जी की आरती करके प्रसाद लगाया जाए और प्रसाद का वितरण भी किया जाए।
 सच्चे मन, शुद्ध चित्त व पवित्र भावना के साथ हनुमान जी की उपासना और बजरंग बाण का पाठ करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाले कष्ट तथा बाधाओं का निवारण होने लगता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद

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