Sunday, 8 April 2018

खेतीके लिए भी हैं वास्तु नियम 
हमारे देश में खेती यानि कृषि कार्य मौसम पर आधारित है। स्थान विशेष का वातावरण और भूमि की स्थिति के अनुसार फसल की पैदावार होती है। परन्तु कई बार सब कुछ सामान्य होने के बाद भी खेती में नुक्सान उठाना पड़ता है अथवा तैयार फसल के भंडारण, विक्रय या उपयोग में अच्छी खासी परेशानी या नुक्सान झेलना पड़ता है। इसका कारण खेती के लिए आवश्यक वास्तु नियमों की अवहेलना हो सकता है।
सही दिशा में करें काम 
खेत की जुताई एवं बीज रोपण कार्य उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर ही करना चाहिए। फूलों और पौधों की नर्सरी, खेत के पूर्व या पश्चिम दिशा में ही लगानी चाहिए। खेती की जमीन में मुर्गी पालन करना हो तो पश्चिम में और भेड़ या बकरी पालन के लिए दक्षिण या पश्चिम दिशा उत्तम मानी गयी है। वहीँ तालाब बनाकर मछली पालन के लिए खेत की पूर्व या उत्तर दिशा का उपयोग करना चाहिए। फसल तैयार होने पर गोबर की खाद लगाने या फसल की कटाई के समय किसान का चेहरा पूर्व या उत्तर की और होना शुभ रहता है। पक्षियों से फसल को बचाने हेतु पुतले लगाने के लिए दक्षिण या पश्चिम दिशा को काम में लेना चाहिए। खेत में पानी देने वाले कुंएं या नलकूप उत्तर या पूर्व-उत्तर में होने चाहिए। कटी हुई फसल खेत में पश्चिम या दक्षिण में रखें। दक्षिण-पूर्व में रखने से आग लगने से फसल नष्ट होने का ख़तरा रहेगा।
खेत में मंदिर अशुभ
वास्तु नियमों के अनुसार खेत में मंदिर नहीं होना चाहिए। अगर मंदिर बनवाना ज़रूरी है तो पश्चिम दिशा में इस प्रकार बनवाएं कि उसमें स्थापित देवी-देवताओं का मुख पूर्व की ओर रहे। ऐसे मंदिर में सुबह और शाम नियम से पूजा आरती करनी आवश्यक है। सूर्यास्त के बाद खेत में कोई काम नहीं करना चाहिए। खेत के बीच में कोई टीला, चबूतरा ऊंचा वृक्ष या पूर्वजों का ठौर नहीं रखना चाहिए। नई फसल के लिए बीज रोपने का काम शुभ मुहूर्त में मंत्रोपचार के साथ मंगलवार और शनिवार के अलावा किसी भी दिन किया जा सकता है।
फलदार पेड़ों के लिए भी रखें ध्यान 
अगर खेत में फलों का उत्पादन करना हो तो पूर्व या उत्तर दिशा में कम ऊंचाई वाले वृक्ष लगाने चाहिए। आम. इमली, जामुन, आंवला और अंगूर दक्षिण में, अमरुद पूर्व में, अनार पश्चिम में और शरीफा उत्तर दिशा में लगाने चाहिए। खेत की जमीन का ढलान पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहना चाहिए। खेत में दक्षिण या पश्चिम दिशा में अगर गड्ढे हों तो उन्हें मिटटी से भरकर समतल कर देना चाहिए।
खेती से जुडी अन्य जरूरी बातें
यदि खेत में गोबर के कंडे एकत्र करने हों तो दक्षिण-पूर्व की तरफ ही रखने चाहिए। खेती से सम्बंधित औजार और पालतू पशुओं के लिए चारा रखने हेतु सही दिशा दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम मानी गयी है। आजकल खेत में फ़ार्म हाउस बनाए जाने का चलन है। इसके लिए उपयुक्त स्थान दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पश्चिम होती है। परंतु खेत का काम करने वाले मजदूरों के रहने का कमरा या झोंपड़ा दक्षिण-पश्चिम दिशा में कभी नहीं बनवाना चाहिए। --- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तुविद, आगरा 

Wednesday, 17 January 2018

शुभता के लिए नए साल में करें ये आसान उपाय
नया साल हमारे अंदर सभी को मंगलकामनाएं देने की सद्भावना  उत्पन्न करता है। जिससे कि आने वाले दिनों में हमारे जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य, संतान, धन लाभ आदि प्राप्त होते रहें। नया साल सभी के लिए शुभ और मंगलकारी हो, इसके लिए यहां हम कुछ ऐसे आसान उपाय बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर जीवन से नकारात्मकता और अशुभता को दूर किया जा सकता है। लाल किताब के अनुसार इन उपायों को बिना किसी व्यवधान के लगातार अपने इष्ट देव पर पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास बनाये रखते हुए धैर्य पूर्वक चालीस या तेतालीस दिन तक करना चाहिए। अगर ऐसा समयाभाव के कारण संभव न हो तो हर आठवें दिन ये उपाय नियत अवधि तक करने चाहिए। अगर उपाय करते समय नागा हो जाए तो नए सिरे से ही उपाय आरंभ करना चाहिए वरना किये गए उपाय कोई सकारात्मक फल नहीं देते हैं।
धन संबंधी लाभ के लिए उपाय
अथक प्रयासों के बावजूद यदि धन संबंधी नुक्सान न रुक रहा हो तो प्रतिदिन कौओं को गेहूं की चुपड़ी रोटी खिलाएं। यदि अकारण ही धन खर्च होता रहता है तो शुक्ल पक्ष के शनिवार से आरंभ करते हुए प्रत्येक शनिवार को काले कुत्ते को तेल से चुपड़ी रोटी खिलाएं। किसी को भी दिया गया धन या कर्जा वापिस मिलने में परेशानी आ रही हो तो ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जप करते हुए सूर्योदय के समय तांबे के पात्र में जल और लाल मिर्च के ग्यारह बीज मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। व्यापार में अगर अचानक बिक्री में गिरावट आने लगी हो तो शुक्ल पक्ष के गुरूवार से आरंभ करते हुए प्रत्येक गुरूवार को व्यापार स्थल या दूकान के प्रवेश द्वार पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर उस पर थोड़ा गुड़ और चने की दाल रखनी चाहिए।
रोग निवारण के लिए उपाय 
किसी भी तरह की मानसिक परेशानी और तनाव को दूर करने के लिए प्रतिदिन हनुमान जी की उपासना करना तथा हनुमान चालीसा का पाठ करना आसान उपाय है। वहीँ प्रत्येक शनिवार को शनिदेव पर सरसों का तेल चढाने से भी रोगों से मुक्ति मिलने लगती है। दवाएं सेवन के बावजूद किसी रोग के ठीक होने में देरी होने पर मरीज के सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के टुकड़े रख देने चाहिए। शहद में चन्दन मिलाकर मरीज को चटाने, रविवार को बूंदी के सवा किलो लड्डू का प्रसाद मंदिर में चढ़ाकर वितरित करने और मंदिर में गुप्त दान करते हुए स्वास्थ्य लाभ की कामना करने से भी रोग निवारण में शीघ्र लाभ मिलने लगता है।
संतान और विवाह लाभ के लिए उपाय
संतान प्राप्ति में देरी हो रही हो तो नियम से कुत्ते को रोटी खिलाने तथा शुद्ध सोने को गर्म करके गाय के दूध में बुझाकर पीने एवं संतान गोपाल स्त्रोतम का पाठ करने से शुभ परिणाम मिलते हैं।  विवाह में रुकावट, विवाह तय होने के बाद टूट जाने की स्थिति में विवाह योग्य कन्या को चाहिए कि वह प्रतिदिन स्नान के बाद शिव मंदिर में शिवलिंग पर गाय का  दूध मिश्रित जल अर्पित करते हुए ॐ सोमेश्वराय नमः मंत्र का एक माला जप करे। किसी भी दोषपूर्ण ग्रह के प्रभाव से अगर संतान और विवाह में बाधाएं आ रही हों तो उस दोषपूर्ण ग्रह से सम्बंधित वस्तुओं का दान निर्धारित दिन पात्र व्यक्ति को करते हुए भगवान् शिव और भगवान् शिव के बालस्वरूप की आराधना करनी चाहिए। संतान की लम्बी उम्र की कामना के लिए पिता को गुरूवार का व्रत नियमपूर्वक करना चाहिए।
ग्रहों की शुभता हमारे आचरण एवं शुभ कार्यों पर भी निर्भर होती है। इसलिए ग्रहों को अपने अनुकूल और शुभ बनाने के लिए कोई भी अनुचित कार्य एवं आचरण करने से बचना चाहिए। मांसाहार, धूम्रपान, नशीले पदार्थों और शराब का सेवन, पर स्त्री संबंध बनाने, झूठी गवाही देने, माता-पिता, बड़े बुजुर्ग एवं गुरुजनों को अपमानित करने, दूसरों को कष्ट पहुंचाने, निरीह जीवो के प्रति अत्याचार करने, किसी के साथ धोखा करने और किसी की चल-अचल संपत्ति को हड़पने जैसे कार्यों से ग्रह अशुभ फल ही देते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो जीवन में शुभ कार्य ही करने चाहिए। ---प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष धन्वंतरि, आगरा 
शुभ कार्यों का शुभारंभ है मकर संक्रांति 
भगवान भास्कर अर्थात सूर्य देव के एक वर्ष में क्रम से बारह राशियों में प्रवेश करने की प्रक्रिया को सूर्य की संक्रांति कहा जाता है। परन्तु जिस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो उस दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव के उत्तरायण हो जाने से समस्त शुभ कार्यों का शुभारंभ हो जाता है। हिन्दू संस्कृति में मकर संक्रांति एक ऐसा पावन पर्व है, जिस दिन पवित्र नदियों में स्नान, ध्यान, पूजा-पाठ और श्रद्धानुसार गरीबों को दान करना शुभ फलदायी माना जाता है।
इस वर्ष है सर्वार्थसिद्ध योग
इस वर्ष मकर संक्रांति रविवार 14 जनवरी को पड़ रही है। इस दिन सर्वार्थसिद्ध योग होने के साथ-साथ शिव प्रदोष व्रत भी है। इसलिए इस बार की मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से जीवन में शुभ फल प्राप्त होंगे तथा सकारात्मक ऊर्जा का प्रादुर्भाव भी होगा।
पूजन और दान की विधि 
मकर संक्रांति के अवसर पर प्रातः सूर्योदय से पूर्व गंगा, यमुना आदि पवित्र नदियों में स्नान करके सूर्योदय होने पर तांबे के बर्तन में जल, गुड़, लाल चंदन, रोली  और लाल पुष्प लेकर ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का निरंतर उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। अगर पवित्र नदियों में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगा जल मिलाकर ॐ गंगे मां नमः मंत्र का जप करते हुए स्नान करना चाहिए। इसके बाद श्रद्धानुसार मूंग की दाल और चावल की खिचड़ी, तिल, गुड़, घी, नमक, तिल और गुड़ या चीनी से बनी गजक, उड़द की दाल आदि के अलावा दैनिक उपयोग में काम आने वाली वस्तुओं का दान गरीबों एवं जरूरतमंदों को करना चाहिए। स्वयं भी तिल से बने व्यंजन, पकाई हुई खिचड़ी और मिष्ठान आदि का सेवन  करना चाहिए।
बारह राशियों पर प्रभाव
इस वर्ष मकर संक्रांति पर सर्वार्थसिद्ध योग और रवि योग होने के कारण मकर संक्रांति का मिला जुला प्रभाव अलग-अलग राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा। मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, धनु, मकर, कुंभ तथा मीन राशि के जातकों को जहां इस वर्ष धन लाभ हो सकता है, वहीँ पारिवारिक और व्यक्तिगत मामलों में तनाव भी हो सकता है। इन जातकों को इस वर्ष यात्राएं करने का भी अवसर मिलेगा। मेष, वृष, कन्या और वृश्चिक राशि के जातकों को इस वर्ष धन हानि का सामना करना पड़ सकता है। इन जातकों को अकारण ही मानसिक चिंता और संतान पक्ष से कष्ट भी हो सकता है।
करें ख़ास उपाय 
इस वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर चूंकि रवि योग भी है इसलिए शनि देव की साढ़े साती और ढैय्या से पीड़ित जातको को भगवान शिव के मंदिर में जाकर शिव लिंग पर काले तिल, काली उड़द की दाल, गुड़ मिश्रित जल से अभिषेक करना चाहिए। इसके साथ-साथ इस दिन ॐ नमो शिवाय मंत्र का जप करते हुए शिव लिंग का गंगा जल से अभिषेक करना भी शुभ फलदायी है। इससे शत्रुओं से बचाव, यात्रा में लाभ, मानसिक कष्टों से छुटकारा एवं व्यापार में हानि आदि पर रोक लगेगी। --- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद, आगरा       

Sunday, 19 November 2017

18 नवम्बर : शनि अमावस्या पर विशेष

शनिदेव की कृपा के लिए करें उपासना 
इस वर्ष 18 नवम्बर को शनैश्चरी अमावस्या है। जिस अमावस्या को शनिवार पड़ता है, उसे शनैश्चरी अमावस्या कहा जाता है। इस बार की शनैश्चरी अमावस्या इस मायने में ख़ास है कि इस तिथि को प्रातः 7 बजे से रात्रि 9 बजे तक अमृत योग रहेगा। माना जाता है कि अमृत योग में शनि देव की विधि पूर्वक उपासना से सुख. समृद्धि, संपत्ति, शांति, संतान और आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है, साथ ही बिगड़े हुए कार्य भी बनने लगते हैं। शनि की साढ़े साती से प्रभावित चल रहे जातकों के लिए इस दिन शनि देव की आराधना विशेष लाभकारी होगी।
ऐसे करें शनि देव की पूजा
अमावस्या के दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व ही गंगा, यमुना अथवा किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो तो घर पर ही साधारण पानी में गंगा या यमुना का जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद अपने इष्टदेव, गुरुजन, माता-पिता, श्री गणेश, भगवान शिव और सूर्यदेव की आराधना करके सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। शनैश्चरी अमावस्या को अपने पितरों के निमित्त भी दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल मिश्रित जल अर्पण करना चाहिए। ऐसा करने से पितृ दोष दूर होकर पितरों की कृपा जीवन  भर मिलती रहती है। पीपल पर प्रातः अथवा शाम को जल चढ़ाना भी अच्छा उपाय है।  शनि देव की मूर्ति पर उनके चरणों की ओर देखते हुए सरसों का तेल, काले तिल, लोहे की कील या सिक्का, काले वस्त्र का टुकड़ा, काजल आदि अर्पित करते हुए शनि देव से सभी दुःख और कष्ट दूर करने की प्रार्थना करनी चाहिए।
इस अमावस्या करें दान 
35 से 42 वर्ष की आयु सीमा वाले जातकों तथा शनि  के अशुभ प्रभाव से पीड़ित जातकों को इस शनैश्चरी अमावस्या पर शनि देव की उपासना करते हुए श्रद्धानुसार लोहा, भैंस, काली उड़द या मसूर की दाल, सरसों का तेल, काले रंग की वस्तुएं जैसे छाता, जूते, कम्बल, कपड़ा आदि का दान शाम के समय किसी वृद्ध एवं निर्धन व्यक्ति को करना अत्यंत ही शुभ परिणाम देने वाला सरल उपाय है।
रोग निवारण के लिए जपें मंत्र
निर्बल  राशिगत शनि ग्रह के कारण लकवा, कमर दर्द, चोट लगने से दर्द एवं अंग भंग, पेट रोग, कुष्ठ, दमा, नेत्र रोग, वात  रोग आदि होने की संभावना रहती है। इसलिए इन रोगों से बचाव के लिए जातकों को शनि ग्रह से संबंधित मंत्र "ओउम शं शनैश्चराय नमः" का प्रतिदिन ग्यारह माला जप करना चाहिए। इसके अलावा शनि स्तोत्र, शनि स्तवन, शनि पाताल क्रिया, महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र, हनुमान उपासना आदि का विधि पूर्वक पाठ करना भी बहुत उपयोगी  माना गया है।--- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष धन्वंतरि, आगरा  

Monday, 13 November 2017

धन की हो कमी तो करें ये सरल उपाय

जीवन की मूलभूत ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पास में धन का होना बहुत आवश्यक है। धन के अभाव में मनुष्य को जीवन में कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र में ऐसे अनेक उपाय दिए गए हैं, जिन्हें श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से धन की कमी दूर हो सकती है।

** शुक्ल पक्ष के सोमवार अथवा शनिवार को गेहूं पिसवाते समय उसमें ग्यारह तुलसी की पत्तियां तथा दो केसर के धागे मिलाकर उससे बने आटे की रोटी का सेवन करते रहने से धन का अभाव दूर होने लगता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि इस आटे को कभी भी बर्बाद नहीं करना चाहिए और न ही पैरों से लगने देना चाहिए।

** धन की हानि का सामना करना पड़ रहा हो तो घर के मुख्य द्वार पर थोड़ा सा लाल गुलाल छिड़क कर वहां गाय के शुद्ध घी का दो मुखी दीपक जलांना चाहिए। दीपक के स्वतः ही बुझ जाने पर उसे गुलाल सहित बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।

** शुक्ल पक्ष के सोमवार से आरम्भ करके शिवलिंग पर प्रतिदिन गंगाजल का अभिषेक करके साबुत चावल चढ़ाकर धन प्राप्ति की कामना करने से आर्थिक समृद्धि आने लगती है।

** व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो तो शुक्ल पक्ष के गुरूवार के दिन ग्यारह धन दायक कौड़ी लेकर उन्हें शुद्ध हल्दी से रंगकर नए पीले रंग के वस्त्र में बांधकर धन रखने वाली तिजोरी या आलमारी में रख दें। वास्तु नियमों के अनुसार धन रखने वाली तिजोरी या आलमारी का मुख सदैव उत्तर दिशा की ओर खुलना चाहिए।

** निर्धनता निवारण के लिए शुक्ल पक्ष के गुरूवार से आरंभ करके शिवलिंग पर जल का अभिषेक करके पीपल के वृक्ष पर जल देकर पूजा करके दीपक जलाएं अथवा शुक्ल पक्ष के सोमवार से आरंभ करके चांदी से बने शिवलिंग का प्रतिदिन श्रद्धाभाव से पूजन करना चाहिए।

** वास्तु के नियमानुसार आय से अधिक खर्च को कम करने के लिए भवन की उत्तर दिशा को हमेशा साफ़-सुथरा और दक्षिण दिशा से नीचा रखना चाहिए तथा उत्तर दिशा में विधिपूर्वक श्री यंत्र स्थापित करके प्रतिदिन उसकी पूजा करने से अनावश्यक खर्चे कम होने लगते हैं।

** बिना किसी वजह से अगर धन न रुकता हो तो शुक्ल पक्ष के गुरूवार को घर की बहिन, बेटी या बहू से घर के मुख्य द्वार को दाहिने एवं बायीं तरफ गंगाजल से पवित्र कराएं तथा दाहिने हाथ की अनामिका से हल्दी और दही के घोल से एक स्वास्तिक बनवाकर उसपर थोड़ा सा गुड़ लगाकर उस पर शहद की एक बूंद टपकाएं। नियमित रूप से हर गुरूवार को इस उपाय को करते रहने से धन की कमी दूर होगी।

** बारह वर्ष तक की आयु के बच्चों को प्रातः खट्टी-मीठी टॉफी बांटने, धब्बेदार कुत्ते को भोजन देने, रात्रि में सोने से पूर्व किचन में जूठे बर्तन साफ़ करके रखने, अशोक वृक्ष की जड़ के एक टुकड़े को पूजा स्थल में रखकर प्रतिदिन पूजा करने, बुधवार के दिन किसी को उधार न देने और व्यापारिक पत्राचार में हल्दी एवं केसर का प्रयोग करने जैसे उपाय अपनाने से भी जीवन में धन की कमी दूर होने लगती है और आर्थिक समृद्धि आती है । --- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषाचार्य , आगरा 

Saturday, 22 July 2017

भगवान शिव को प्रिय है श्रावण मास
श्रावण मास अर्थात सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।मान्यता  है कि इसी मास में जगत जनंनी पार्वती जी ने कठोर व्रत उपवास करके भगवान शिव को प्रसन्न किया और उन्हें पति के रूप में प्राप्त किया. वहीँ एक मान्यता के अनुसार इसी मास में देवी सती ने अपने पिता दक्ष  द्वारा भगवान शिव को यज्ञ में न बुलाये जाने को अपमान मानते हुए यज्ञ वेदी में अपना शरीर त्याग दिया और हर जन्म में शिव को ही अपना पति बनाने का प्रण किया।
शुभ एवं अद्भुत संयोंग
इस वर्ष श्रावण मास का शुभारंभ 10 जुलाई सोमवार से चन्द्रांश  योग में हो रहा है तथा समापन 7 अगस्त को श्रवण नक्षत्र के साथ सोमवार को ही होगा। इस वर्ष श्रवण मास में 5 सोमवारों का संयोग बन रहा है। जिन जातकों की कुंडली में गजकेसरी योग है उनके लिए श्रवण मास में शिव का पूजन विशेष फलदायी होगा। लग्न या चंद्रमा से अगर गुरु केंद्र में हो तथा शुभ ग्रह से दृष्ट हो, अस्त या नीच या शत्रु राशि में  न हो तो गजकेसरी योग बनता है। इस योग वाले जातक जीवन में उच्च पद. धन, संपदा आदि प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यता यह है कि इस मास में प्रातः जल्दी उठकर स्नान के बाद भक्ति भाव और विधि विधान से भगवान शिव का पूजन एवं अभिषेक करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती  हैं तथा उन्हें किसी तरह का कोई भय नहीं रहता। विवाहित महिलाओं को अपने सुहाग की रक्षा के लिए तथा अविवाहित कन्याओं को शीघ्र विवाह तथा गुणवान पति पाने की अभिलाषा के साथ इस मास में व्रत रखना तथा भगवान शिव का अभिषेक करना शुभ फलदायी होता है। विवाह की इच्छा रखने वालों को इस मास के प्रत्येक सोमवार को गाय का कच्चा दूध, बेलपत्र, गंगाजल. शमीपत्र, नारियल पानी, भांग, खोये की मिठाई तथा गुलाबी रंग के गुलाल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिये। संतान के लिए गाय के  दूध व घी एवं गेहूं से, धन प्राप्ति के लिए गाय का दूध, चावल तथा गन्ने के रस से और स्वास्थ्य रक्षा के लिए गाय के दूध व दही से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। शनि की साढ़े साती से  परेशान जातकों  के लिए गाय का दूध , पांच बेलपत्र, भांग, धतूरा,मदार एवं कनेर पुष्प,गंगाजल से अभिषेक करने से लाभ मिलता है।
जन्म राशि के अनुसार अभिषेक
भगवान शिव की कृपा पाने के लिए अपनी जन्म राशि के अनुसार भी भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। जन्म राशि का पता न हो तो अपने बोलते हुए नाम के अनुसार भी अभिषेक किया जा सकता है। मेष और वृश्चिक राशि वालों को पांच बेलपत्र, नारियल पानी,अनार के रस, धतूरा और भांग से, वृष और तुला राशि वालों को आक के पुष्प, शमी पत्र एवं इत्र से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।  मिथुन एवं कन्या राशि वाले जातक  ग्यारह बेलपत्र तथा गंगाजल से अभिषेक कर सकते हैं। कर्क राशि वाले भांग, बेल का रस एवं कदली फल से,सिंह राशि वाले जल, इत्र एवं गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें तो उन्हें लाभ मिलेगा। धनु एवं मीन राशि वालों को सरसों के तेल, कनेरकी पुष्प व दूब घास से और मकर व कुंभ राशि वालों को बेलपत्र, चंदन, और श्री खंड से भगवान् शिव का अभिषेक करना चाहिए। --- प्रमोद  अग्रवाल. ज्योतिषाचार्य , आगरा

Monday, 3 April 2017

घर में सामान रखने की सही दिशा जानें

वास्तु, प्रकृति से मनुष्य के सामंजस्य को बनाये रखने की वह अद्भुत कला है जो दस दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, उत्तर-पूर्व यानी ईशान, दक्षिण पूर्व यानी आग्नेय, दक्षिण- पश्चिम यानी नैऋत्य , उत्तर -पश्चिम यानी वायव्य, आकाश और पाताल) तथा पांच तत्वों (आकाश, वायु, जल, अग्नि एवं पृथ्वी) पर आधारित होती है।  किसी भी दिशा या तत्व के असंतुलित अथवा दोषपूर्ण हो जाने से वास्तु नकारात्मक प्रभाव देने लगती है। जिसके कारण उसमें रहने वालों को बहुत सी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।
जिस तरह से भवन या भूखंड के निर्माण में वास्तु के नियमों का पालन किया जाता है , उसी तरह निर्मित भवन के भीतर भी उपयोग में आने वाले सामान को सही दिशा में रखना आवश्यक है, वरना उसका नकारात्मक असर वहां रहने वालों को प्रभावित करेगा।
ड्रेसिंग टेबल आज के समय में सबसे अधिक उपयोग में आती है। भवन के उत्तर या पूर्व की दिशा इसके लिए उपयुक्त मानी गयी है। परंतु इसमें ध्यान रखने वाली बात यह है कि ड्रेसिंग टेबल में लगा आईना सोने के पलंग के ठीक सामने न हो और सोते समय उसमें शरीर का कोई अंग भी दिखाई न देता हो. यदि ऐसा है तो सोने से पहले उस आईने को ढक  देना चाहिए अन्यथा पति-पत्नी के रिश्ते तो खराब होंगे ही, बीमारिया भी पीछा नहीं छोड़ेंगी।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर, जनरेटर, ट्रांसफॉर्मर, इन्वर्टर, मिक्सी, विद्युत् मीटर आदि को सदैव दक्षिण पूर्व अथवा दक्षिण दिशा में ही रखना चाहिए। किचन में गैस या स्टोव को दक्षिण-पूर्व में रखना उचित होता है।  वाशिंग मशीन को उत्तर-पश्चिम दिशा में ही रखना चाहिए अगर इस दिशा में जगह न हो तो उत्तर या पूर्व के मध्य में भी रख सकते हैं।
घर-परिवार में अनावश्यक पैसा खर्च न हो, इसके लिए धन और आभूषण रखने की आलमारी या तिजोरी को दक्षिण दिशा की दीवार से लगाकर इस प्रकार रखें कि उसके दरवाजे उत्तर दिशा में खुलें। बैडरूम में तिजोरी को भूलकर भी नहीं रखना चाहिए। बेसरूम के दरवाजे के ठीक सामने पलंग को रखना दोषपूर्ण है। इसके अलावा बैडरूम में युद्ध, लड़ाई, डूबता सूर्य, मृत पशु या मनुष्य की तस्वीर लगाने से बचना चाहिए वरना इनसे निकलने वाली नकारत्मक ऊर्जा जीवन को प्रभावित करेगी। पति-पत्नी के अच्छे संबंधों के लिए बैडरूम में लवबर्डस, राधकृष्ण, शंख या हिमालय आदि की तस्वीर लगाई जा सकती है।
भवन के गेस्टरूम में आलमारी के लिए उपयुक्त स्थान पश्चिम या दक्षिण की दीवार है। मेज या कुर्सी पूर्व या उत्तर की ओर रखें. गेस्टरूम में अलग से पूजा घर न बनवाएं। घर में टूटा दर्पण या बंद घड़ी कभी न रखें। घड़ी के लिए सकारात्मक दिशा पूर्व, उत्तर या पश्चिम की दीवार है।
ड्राईंग रूम या लॉबी में सकारात्मक ऊर्जा प्रवाह के लिए मछली घर या एक्वेरियम पूर्व उ\या उत्तर में इस प्रकार रखें कि  बाहर से आने वालों की नजर सीधे उस पर पड़े। बैडरूम में मछली घर नहीं रखना चाहिए अन्यथा मानसिक अस्थिरता या अनिद्रा की समस्या हो सकती है।
यदि घर में ही ऑफिस या व्यावसायिक कार्य करना है तो दक्षिण-पश्चिम दिशा सबसे श्रेष्ठ मानी गयी है। इस दिशा में स्वयं का मुख पूर्व या उत्तर की ओर रखना चाहिए जबकि क्लाइंट्स का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर रहना चाहिए।
डाइनिंग टेबल किचन के पास या उससे लगी दक्षिण-पूर्व दीवार  के पास होना आवश्यक है। अन्य दिशा में होने से कब्ज, अतिसार और वातरोग होने की संभावना बानी।  किचन में गैस या स्टोव और बर्तन धोने की सिंक पास-पास नहीं होने चाहिए। ---प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद एवं वास्तुविद